Thursday, 23 July 2015
Friday, 3 July 2015
शाओलिन बौद्ध मंदिर ,हेनान,चीन
चीनी मार्शल आर्ट के लिए प्रसिद्ध हनान प्रांत की तडंफडं काउन्टी में स्थित शाओलिन मंदिर के पश्चिम में ईट-पत्थरों से बना पगोडा समूह हैं। प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षुओं के शव को सुरक्षित रखने के लिए निर्मित ये पगोडा बौद्ध भिक्षुओं की अंत्येष्टि की भारतीय धार्मिक विधि के प्रभाव में बनाए गए हैं।
इस तरह का प्राचीनतम पगोडा हनान प्रांत की आनथाडं काउन्टी के लिडंछ्वेन मंदिर में स्थित है, जिसका निर्माण 563 ई. में भिक्षु ताओ फिडं की अस्थियों को रखने के लिए किया गया था। शाओलिन मंदिर उत्तरी वेइ राजवंश के थाएह शासन काल में निर्मित किया गया, पर उस समय के समाधि पगोडा अब नहीं बचे हैं। अब तक विद्यमान पगोडाओं में सबसे पुराना थाडं राजवंश(618-907) में निर्मित भिक्षु का वान का समाधि पगोडा है। इसका निर्माण 791 ई. में हुआ था।
यहां स्थित 227 समाधि पगोडाओं में से 211 ईंटों से और 16 पत्थरों से बनाये गये हैं। एक मंजिले या बहुमंजिले और एक ओरी या बहुओरी वाले ये पगोडा भिन्न भिन्न आकार के हैं। चौकोर, समकोणीय, गोल, अष्टकोणीय पगोडाओं की अलंकृत खिड़कियां व दरवाजे हैं। प्राचीन चीनी वास्तु कला तथा बौद्ध धर्म के इतिहास के अध्ययन की दृष्टि से ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इनमें से दो पगोडा उल्लेखनीय हैं। एक है 1339 में निर्मित "च्वीआन समाधि पगोडा", जिसका समाधि लेख जापान के चडंफा मंदिर के महंत शाओय्वान ने लिखा, जो उस समय चीन में अध्ययन करते थे। दूसरा वह है, जो एक भारतीय भिक्षु के लिए 1564 में बनाया गया।
शाओलिन बौद्ध मंदिर दुनिया भर में अब तक 40 कंपनियां स्थापित कर चुका है और अब उसने बौद्ध धर्म से प्रेरित मार्शल आर्ट का प्रचार-प्रसार वैश्विक स्तर पर करने की उम्मीद जताई है।
इस मंदिर के प्रमुख भिक्षु शी योंगक्सिन ने कहा कि हम फिलहाल लंदन व बर्लिन सहित दुनिया के कई शहरों में 40 से अधिक कंपनियों का संचालन कर रहे हैं। मठ कुछ अन्य कंपनियों के परिचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
चीनी मार्शल आर्ट के लिए प्रसिद्ध हनान प्रांत की तडंफडं काउन्टी में स्थित शाओलिन मंदिर के पश्चिम में ईट-पत्थरों से बना पगोडा समूह हैं। प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षुओं के शव को सुरक्षित रखने के लिए निर्मित ये पगोडा बौद्ध भिक्षुओं की अंत्येष्टि की भारतीय धार्मिक विधि के प्रभाव में बनाए गए हैं।
इस तरह का प्राचीनतम पगोडा हनान प्रांत की आनथाडं काउन्टी के लिडंछ्वेन मंदिर में स्थित है, जिसका निर्माण 563 ई. में भिक्षु ताओ फिडं की अस्थियों को रखने के लिए किया गया था। शाओलिन मंदिर उत्तरी वेइ राजवंश के थाएह शासन काल में निर्मित किया गया, पर उस समय के समाधि पगोडा अब नहीं बचे हैं। अब तक विद्यमान पगोडाओं में सबसे पुराना थाडं राजवंश(618-907) में निर्मित भिक्षु का वान का समाधि पगोडा है। इसका निर्माण 791 ई. में हुआ था।
यहां स्थित 227 समाधि पगोडाओं में से 211 ईंटों से और 16 पत्थरों से बनाये गये हैं। एक मंजिले या बहुमंजिले और एक ओरी या बहुओरी वाले ये पगोडा भिन्न भिन्न आकार के हैं। चौकोर, समकोणीय, गोल, अष्टकोणीय पगोडाओं की अलंकृत खिड़कियां व दरवाजे हैं। प्राचीन चीनी वास्तु कला तथा बौद्ध धर्म के इतिहास के अध्ययन की दृष्टि से ये अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इनमें से दो पगोडा उल्लेखनीय हैं। एक है 1339 में निर्मित "च्वीआन समाधि पगोडा", जिसका समाधि लेख जापान के चडंफा मंदिर के महंत शाओय्वान ने लिखा, जो उस समय चीन में अध्ययन करते थे। दूसरा वह है, जो एक भारतीय भिक्षु के लिए 1564 में बनाया गया।
शाओलिन बौद्ध मंदिर दुनिया भर में अब तक 40 कंपनियां स्थापित कर चुका है और अब उसने बौद्ध धर्म से प्रेरित मार्शल आर्ट का प्रचार-प्रसार वैश्विक स्तर पर करने की उम्मीद जताई है।
इस मंदिर के प्रमुख भिक्षु शी योंगक्सिन ने कहा कि हम फिलहाल लंदन व बर्लिन सहित दुनिया के कई शहरों में 40 से अधिक कंपनियों का संचालन कर रहे हैं। मठ कुछ अन्य कंपनियों के परिचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आयरन पगोडा,कैफेंग शहर,हेनान,चीन
उत्तरी सांग (960-1127) राजवंश की राजधानी कैफेंग में,प्रसिद्ध वास्तुकार यू हाओ ने योंगओ बौद्ध मंदिर के हिस्से के रूप में एक शानदार लकड़ी के पगोडे का निर्माण किया (965-995 ईसवी ) में जिसे वास्तुकला का चमत्कार मना गया। 1044 में दुर्भाग्य से, यह लकड़ी के पैगोडा की संरचना बिजली गिरने के बाद जल गयी ,सम्राट रेंजोंग (1022-1063) के आदेश के तहत, एक नया पगोडा उसे जगह बनाया गया ,यह पैगोडा काम पकी ईटो से बनाया गया और ईटो का रंग लौह की रंग की तरह था जिस से यह पगोडा लोहे से बना लगता इस कारण इस पगोडा का नाम" आयरन पगोडा" रखा गया। 1847 पीली नदी अपने तटों को तोड़ कर योंगओ बौद्ध मंदिर में घुस गयी और मंदिर गिर गया पर यह आयरन पगोडा सुरक्षित बच गया। ऐतिहासिक रूप से, इस पगोडा ने 38 भूकंप, छह बाढ़ और कई अन्य आपदाओं का अनुभव किया है, लेकिन यह लगभग 1000 वर्ष से ऐसा ही खड़ा है।
उत्तरी सांग (960-1127) राजवंश की राजधानी कैफेंग में,प्रसिद्ध वास्तुकार यू हाओ ने योंगओ बौद्ध मंदिर के हिस्से के रूप में एक शानदार लकड़ी के पगोडे का निर्माण किया (965-995 ईसवी ) में जिसे वास्तुकला का चमत्कार मना गया। 1044 में दुर्भाग्य से, यह लकड़ी के पैगोडा की संरचना बिजली गिरने के बाद जल गयी ,सम्राट रेंजोंग (1022-1063) के आदेश के तहत, एक नया पगोडा उसे जगह बनाया गया ,यह पैगोडा काम पकी ईटो से बनाया गया और ईटो का रंग लौह की रंग की तरह था जिस से यह पगोडा लोहे से बना लगता इस कारण इस पगोडा का नाम" आयरन पगोडा" रखा गया। 1847 पीली नदी अपने तटों को तोड़ कर योंगओ बौद्ध मंदिर में घुस गयी और मंदिर गिर गया पर यह आयरन पगोडा सुरक्षित बच गया। ऐतिहासिक रूप से, इस पगोडा ने 38 भूकंप, छह बाढ़ और कई अन्य आपदाओं का अनुभव किया है, लेकिन यह लगभग 1000 वर्ष से ऐसा ही खड़ा है।
डेक्सिअ्न्गगुओ बौद्ध मंदिर ,हेनान,चीन
यह पहली बार 555 ईस्वी, उत्तरी क्यूई काल (550-577) के सम्राट वेन्सुअन शासनकाल के दौरान छठे वर्ष में बनाया गया था और और इस का नाम यह क्सिआंग्गुओ मंदिर दिया गया पर बाद में 712 ईस्वी में तांग साम्राज्य के समय इस का नाम डेक्सिअ्न्गगुओ बौद्ध मंदिर कर दिया गया यह मंदिर सांग राजवंश में एक शाही मंदिर के रूप में अपनी ऊंचाई पर पहुंच गया,लेकिन मिंग राजवंश के समय पीली नदी की बाढ़ में यह तबाह हो गया किंग राजवंश ने इसे फिर से बनवाया
यह पहली बार 555 ईस्वी, उत्तरी क्यूई काल (550-577) के सम्राट वेन्सुअन शासनकाल के दौरान छठे वर्ष में बनाया गया था और और इस का नाम यह क्सिआंग्गुओ मंदिर दिया गया पर बाद में 712 ईस्वी में तांग साम्राज्य के समय इस का नाम डेक्सिअ्न्गगुओ बौद्ध मंदिर कर दिया गया यह मंदिर सांग राजवंश में एक शाही मंदिर के रूप में अपनी ऊंचाई पर पहुंच गया,लेकिन मिंग राजवंश के समय पीली नदी की बाढ़ में यह तबाह हो गया किंग राजवंश ने इसे फिर से बनवाया
प्लूटो जोंगचेंग बौद्ध मंदिर ,चेंगड़े शहर, हेबेई,चीन
प्लूटो जोंगचेंग मंदिर चीन के चेंगड़े शहर जो हेबई प्रांत में मौजूद है , यह चेंगड़े शहर के बाहर मौजूद आठ मंदिरो का हिस्सा है जो यह मौजूद एक रिजॉर्ट के साथ- एक विश्व धरोहर की सूची में शामिल है, यह मंदिर लीफान युआन दवरा चलए जाते है जो यहा मौजूद मंगोलिया और तिब्बतियों जातीय अल्पसंख्यकों के मामलों के लिए एक प्रशासनिक विभाग है और यह करना है की यह मंदिरो में अलग अलग वास्तुशिल्पीय शैली देखि जा सकती है
प्लूटो जोंगचेंग मंदिर चीन के चेंगड़े शहर जो हेबई प्रांत में मौजूद है , यह चेंगड़े शहर के बाहर मौजूद आठ मंदिरो का हिस्सा है जो यह मौजूद एक रिजॉर्ट के साथ- एक विश्व धरोहर की सूची में शामिल है, यह मंदिर लीफान युआन दवरा चलए जाते है जो यहा मौजूद मंगोलिया और तिब्बतियों जातीय अल्पसंख्यकों के मामलों के लिए एक प्रशासनिक विभाग है और यह करना है की यह मंदिरो में अलग अलग वास्तुशिल्पीय शैली देखि जा सकती है
पुइनिंग बौद्ध मंदिर ,चेंगड़े शहर, हेबेई,चीन
17 वीं सदी के बाद ,मिंग राजवंश के आखिर के दौर में उत्तर पश्चिमी चीन (आधुनिक झिंजियांग) के द्ज़ुंगर लोगों इस क्षेत्र में अन्य खानाबदोश घोड़े पर सवार तीरअंदाज़ होकर आने वाले लोगो से गृह युद्ध में उलझे हुए थे ,बाद में सम्राट क्वायान लांग ने किंग राजवंश के खिलाफ होने वाले विद्रोह को दबाने केएक सेना को भेजा। सेना ने वह के विद्रोही राजा द्ज़ुंगर खान को कब्जे में ले लिया इस जीत के बाद जीत की खुशी और विशव शांति की कामना के लिए इस मंदिर को बनाया गया
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